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चन्द्रगुप्त

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विलासिता, पारिवारिक कलह, ईष्या आदि की भी कमी नहीं रही है, जिन के कारण यहां शकों, हूणों, मुगलों आदि के हमले होते रहे और हम सदियों तक गुलाम रहे. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त ने अपनी सूझबूझ और बाहुबल पर, भारत की ओर बढ़ते विदेशी हमलावर सिकंदर को रोका था. इसी चन्द्रगुप्त को केंद्र में रखकर जयशंकर 'प्रसाद' ने 'चन्द्रगुप्त' शीर्षक से नाटक की रचना की है, जिस में भारतीय, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है. प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण यह नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं, प्रत्येक भारतीय पाठक के लिए भी उपयोगी, पठनीय एवं संग्रहनीय है.

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विलासिता, पारिवारिक कलह, ईष्या आदि की भी कमी नहीं रही है, जिन के कारण यहां शकों, हूणों, मुगलों आदि के हमले होते रहे और हम सदियों तक गुलाम रहे. मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त ने अपनी सूझबूझ और बाहुबल पर, भारत की ओर बढ़ते विदेशी हमलावर सिकंदर को रोका था. इसी चन्द्रगुप्त को केंद्र में रखकर जयशंकर 'प्रसाद' ने 'चन्द्रगुप्त' शीर्षक से नाटक की रचना की है, जिस में भारतीय, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है. प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण यह नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं, प्रत्येक भारतीय पाठक के लिए भी उपयोगी, पठनीय एवं संग्रहनीय है.
Additional Information
Title चन्द्रगुप्त Height
Jaishankar Prasad Width
ISBN-13 9789350005118 Binding PAPERBACK
ISBN-10 9789350005118 Spine Width
Publisher सार्वजनिक डोमेन पुस्तकें Pages 0
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